तथ्यों की सुसंगति से संबंधित प्रावधान साक्ष्य अधिनियम की धारा 5 से 55 तक में वर्णित किया गया है तथा सुसंगत तथ्य को अधिनियम की धारा 3 में परिभाषित किया गया है।
इसके अनुसार एक तथ्य दूसरे से सुसंगत कहा जाता है जबकि तथ्यों की सुसंगति से संबंधित इस अधिनियम के उपबंध में दिए गए प्रकारों में से, किसी भी प्रकार में से दूसरे से संसक्त (जुड़ा हुआ) हो ।
सुसंगत तथ्य वे होते हैं जो किसी विवादक में विवाद तो नहीं होते परंतु विवादक तथ्य के अस्तित्व की संभावना को प्रभावित करते हैं और उनका प्रयोग विवादक तथ्य के बारे में अनुमान के लिए किया जा सकता है।
उदाहरण के लिए यदि A पर आरोप है कि उसने B को लूटा, तो विवादक तथ्य यह होगा कि क्या A ने B को लूटा?
किंतु इस मामले में ये तथ्य—
1. यह कि A को लूटने के स्थान पर जाते हुए देखा गया।
2. यह कि दूसरे दिन A एक चाय की दुकान पर चाय पी रहा था तथा C के कहते कि B के लुटेरे की खोज में पुलिस इधर ही आ रही है, A आधी कप चाय छोड़कर चल दिया।